MY BELGAUM CHEMISTS

Monday, March 14, 2011

प्रतिबंधित दवा बेचने पर दस साल की कैद

धर्मशाला। प्रतिबंधित कैप्सूल स्पास्मो प्रोक्सीवोन और पैरा प्रोक्सीवोन की खेप के साथ गिरफ्तार नगरोटा बगवां के जितेंद्र उर्फ जतिन को धर्मशाला के स्पेशल जज (सेशन जज) पीएस राणा की अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के तहत दस साल की कैद और एक लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।

उसे पांच मार्च को दोषी करार दिया गया था। इस मामले में जितेंद्र के दो अन्य साथी रिहा किए जा चुके हैं। जिला न्यायवादी एलआर सैनी ने बताया कि प्रदेश में यह पहला मामला है, जिसमें दवाइयों में प्रतिबंधित ड्रग के इस्तेमाल पर एनडीपीएस एक्ट के तहत आरोपी को सजा सुनाई गई है।

9 फरवरी 2010 को मोटरसाइकिल सवार तीन युवकों को शिवनगर में पुलिस ने नाके पर पकड़ा था। बाइक नगरोटा बगवां निवासी राकेश चला रहा था, जितेंद्र बोरी लेकर बीच में और संजीव कुमार पीछे बैठा था। बोरी में स्पास्मो प्रोक्सीवोन के 12072 कैप्सूल व पैरा प्रोक्सीवोन के 1104 कैप्सूल मिले। इनका बिल युवकों के पास नहीं था।

पुलिस ने तीनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच में पता चला क कैप्सूलों में डेस्ट्रो प्रोपक्सीफेन प्रतिबंधित ड्रग का इस्तेमाल किया गया था। बचाव पक्ष ने जज के समक्ष दलील दी कि दवाइयां ड्रग एक्ट के शेड्यूल-एच में परिभाषित हैं, जिसके चलते पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट का गलत मामला दर्ज किया है। ड्रग्स एक्ट के शेड्यूल-एच में दवाएं होने के चलते इस मामले में कार्रवाई पुलिस द्वारा नहीं, बल्कि ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा की जानी थी।

जिला न्यायवादी ने अदालत में लैबोरेटरी की जांच रिपोर्ट से सिद्ध किया कि इन दवाइयों के निर्माण में सिंथेटिक ड्रग इस्तेमाल किया गया है। इसके प्रतबिंधति होने के कारण इन दवाइयों की अवैध बिक्री एवं नारकोटिक्स ड्रग होने के चलते यह मामला एनडीपीएस एक्ट के तहत ही दर्ज किया गया है। स्पेशल जज ने सरकारी पक्ष की दलीलों को मानते हुए मुख्य आरोपी जितेंद्र उर्फ जतिन को दोषी करार दिया था, जबकि मोटरसाइकिल पर सवार राकेश और संजीव को रिहा कर दिया था। एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी करार दिए जाने पर आरोपी को 10 साल की सजा और एक लाख रुपए जुर्माने के आदेश दिए गए हैं। जुर्माना अदा न करने की सूरत में दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

No comments:

Post a Comment